महाविद्यालय की स्थापना जून 2005 में हुई। आरंभ में विज्ञान संकाय की कक्षाएँ संचालित करने की अनुमति प्राप्त हुई जिसके अन्तर्गत सूक्ष्मजीवविज्ञान, रसायनशास्त्र तथा वनस्पतिशास्त्र के अध्ययन की व्यवस्था की गई। आरंभिक सत्र में मात्र 3 छात्रों के साथ यह महाविद्यालय शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला, गुण्डरदेही, परिसर में संचालित किया गया। बाद में अक्टूबर 2005 में महाविद्यालय शासकीय बालक प्राथमिक शाला, गुण्डरदेही में स्थानान्तरित हुआ। 28 जून 2015 को महाविद्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण माननीय उच्च. शिक्षामंत्री छ.ग. शासन के द्वारा किया गया। वर्तमान में यह महाविद्यालय अपने नवीन भवन में संचालित है। 2008 में संस्था का नामकरण शहीद कौशल यादव के नाम पर किया गया। सत्र 2007-08 से यहां कला एवं वाणिज्य संकाय में अध्ययन की सुविधा प्रारंभ हुई। स्नाकोत्तर स्तर पर एम.ए. राजनीति विज्ञान की कक्षाएं सत्र 2015-16 में तथा स्नाकोत्तर स्तर पर भूगोल की कक्षा सत्र - 2017-18 में प्रारंभ हुई। सत्र 2022-23 में स्नातक स्तर पर हिन्दी साहित्य, जन्तुविज्ञान, गणित एवं भौतिकी विषय तथा स्नातकोत्तर स्तर पर एम.कॉम की स्वीकृति प्राप्त हुई। आरंभ में छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग के द्वारा संचालित यह महाविद्यालय पं.रविशंकर शुक्ल वि.वि.रायपुर से सम्बद्ध था।
वर्तमान में महाविद्यालय को हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के द्वारा विभिन्न कक्षाओं के संचालन हेतु सम्बद्धता प्रदान किया गया है। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय केे निर्धारित पाठयक्रम के अनुसार ही अध्यापन किया जा रहा है तथा विश्वविद्यालय के नियमों व शर्तों के अधीन परीक्षा का संचालन होता है।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इस महाविद्यालय का नामकरण कारगिल युद्ध के शहीद नायक कौशल यादव के नाम पर किया गया है। उन्होंने 25 जुलाई 1999 को जम्मू -कश्मीर में आक्रमणकारियों का मुकाबला करते हुए उच्च सैन्य परम्परा के अनुरुप प्राणोत्सर्ग किया।
नायक कौशल यादव की टुकड़ी को पश्चिम क्षेत्र से जुलू चोटी पर कब्जा कर तिरंगा फहराने का दयित्व सौंपा गया था। पहाड़ पर खड़ी चढ़ाई और रास्ते की गहरी खाइयों के बीच शूून्य डिग्री से कम तापमान जैसी विपरीत परिस्थितियों में यह कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। नायक कौशल यादव की टुकड़ी ने अतुलनीय साहस और संकल्प के साथ पर्वतारोहण कौशल के द्वारा पहाड़ पर रास्ता बनाया। जुलू चोटी पर पहुँचतेे ही उन्हें ऊपर से दुश्मनों द्वारा की गई भारी गोलाबारी का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए पाकिस्तानी बंकर पर जवाबी गोलाबारी की। इस भीषण लड़ाई में नायक कौशल यादव ने दुश्मन के पाँच सिपाहियों को मार गिराया। इस दौरान वे बुरी तरह आहत हो गए और अंततः शौर्यपूर्वक वीरगति पाई। लेकिन उनके बलिदान के साथ ही उनकी टुकड़ी ने जुलू चोटी पर कब्जा करनें में कामयाबी हासिल कर ली। नायक कौशल यादव को उनके विलक्षण पराक्रम के लिए 3 नवम्बर 2000 को नई दिल्ली में मरणोपरांत वीर चक्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
शहीद कौशल यादव का जन्म 4 अक्टूबर 1969 को भिलाई में हुआ था। वे हुडको भिलाई निवासी स्व. रामनाथ यादव तथा श्रीमती धनवंता देवी के सुपुत्र थे। भिलाई में स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे 3 जून 1989 को सैनिक सेवा में सम्मिलित हुए। राष्ट्र सेवा के लिए उन्हें सैन्य सेवा मेडल, वाउण्ड मेडल, विशेष सेवा मेडल से भी सम्मानित किया गया। इस बहादुर सिपाही की स्मृति में स्थापित यह महाविद्यालय अपने को गौरवान्वित अनुभव करता है।