शासकीय महाविद्यालय गुण्डरदेही में मनाया गया हिन्दी दिवस
शासकीय शहीद कौशल यादव महाविद्यालय, गुण्डरदेही में हिन्दी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ महाविद्यालय की प्राचार्य डाॅ.(श्रीमती) श्रद्धा चन्द्राकर ने दीप प्रज्जवलन कर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ” हिन्दी के बदलते स्वरूप और बदलाव को स्वीकार किया जाना चाहिए। ” अंग्रेजी भाषा का वर्चस्व महज भाषा की समस्या नहीं संस्कृति के वर्चस्व का भी प्रश्न हैं। प्राचार्य डाॅ.(श्रीमती) श्रद्धा चन्द्राकर ने बताया कि हिन्दी को सही स्वरूप में रखना हम सभी का कर्तव्य है। भाषा का स्वरूप निरंतर बदलते रहता है। जैसे जापान, जर्मनी, फ्रांस जहां अपने राष्ट्रीय भाषा में ही कार्य होता है व अंग्रेजी का वर्चस्व कम है। सभी छात्र - छात्राओं को हिन्दी को उसके शुद्ध व उत्कृष्ट रूप में उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में 17 से अधिक छात्र - छात्राओं ने भाग लिया। सभी ने हिन्दी के प्रयोग पर बल दिया एवं कुछ ने कविता पाठ भी किया। हिन्दी दिवस के कार्यक्रम में सर्वप्रथम डाॅ.ए.के.पटेल ने हिन्दी दिवस मनाने की विशेषता बतायी कि हिन्दी दिवस के मनाने की शुरूआत कैसे हुई और वर्तमान में हिन्दी भाषा के उपयोग में सर्वाधिक वृद्धि हुई हैं। जो अन्य भाषाओं जैसे ENGLISH व अन्य राज्य भाषाओं से कई गुना अधिक हैं। कु.वंदना, कु.कुसुम, कु.सुनीता, कु.मुस्कान, कु.मनीषा, कु. बीना, दिलीप, कु.गायत्री, छबिलाल, कु.ज्योतिकिरण, मोहित, कु.फलेश्वरी, मिथलेश, कु.लक्ष्मी, कु.दीप्ति, राहुल, भूपेन्द्र, होमेश्वर ने हिन्दी दिवस समारोह भाषण प्रतियोगिता में भाग लिया। कु.वंदना, बी.एससी.भाग - तीन की छात्रा ने हिन्दी दिवस की गुणवत्ता को बताया। वर्तमान में स्कूलों व काॅलेजों में हिन्दी के स्तर का वर्तमान स्वरूप रखा, कु.सुनीता ने भारत वर्ष में भाषा की विविधता पर अपनी बात रखी। बी.एससी.भाग - तीन की छात्रा ने राष्ट्रीयता व क्षेत्रीयता के कारण हिन्दी भाषा के प्रभाव को बताते हुए एक कविता सुनायी । कु. गायत्री, बी.ए. भाग - दो की छात्रा ने ” राष्ट्रवाद की भाषा हिन्दी है ” यह कहते हुए काव्य पाठ किया। छबिलाल, एम.ए.तृतीय सेमेस्टर के छात्र ने आम बोल - चाल की भाषा में अंग्रेजी के बढ़ते उपयोग को बताया व कविता सुनायी। कु.दीप्ति, बी.एससी.भाग - एक की छात्रा ने हिन्दी भाषा को ” भारत माँ की बिन्दी ” का दर्जा देते हुए अपनी बात रखी। श्री त्रिपुरेश पाठक, सहायक प्राध्यापक, राजनीतिविज्ञान ने औद्योगिक व वैज्ञानिक विकास का हिन्दी भाषा पर पड़ रहे प्रभाव के बारे में बताया। सिनेमा के प्रभाव के कारण हिन्दी भाषा के ऐसे प्रसार में हुई बढ़ोतरी को बताया। ऐसे क्षेत्र जहां हिन्दी मुख्य भाषा के रूप में नहीं है उन क्षेत्रों में हिन्दी के उपयोगिता के लिए हिन्दी को सरल व सुगम बनाने की बात कही। श्री डी.एस.सहारे, सहायक प्राध्यापक, समाजशास्त्र ने समाज व साहित्य के बीच अटूट संबंध को बताया। उन्होंने कहा कि हिन्दी भाषा के विकास में मुख्य कमी यह है कि हम भाषा में हो रही गलतियाँ व त्रुटि को छिपाने का प्रयास करते हैं। अतः हिन्दी के विकास को बरकरार रखने के लिए हमें अपने कमियों को सुधार करने का प्रयास करना चाहिए। कार्यक्रम का आभार डाॅ.(श्रीमती) निगार अहमद, सहायक प्राध्यापक, अंग्रेजी ने किया।